Tuesday, November 6, 2018

वित्त मंत्रालय ने आरबीआई से' मांगे थे 3.6 लाख करोड़, आरबीआई ने किया था इनकार

इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र की मोदी सरकार और रिज़र्व बैंक के बीच तनाव की बड़ी वजह 3.6 लाख करोड़ रुपये हैं.
अख़बार लिखता है कि वित्त मंत्रालय ने आरबीआई से कहा था कि वो यह राशि उसे दे दे और आरबीआई ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था.
ख़बर के मुताबिक रिज़र्व बैंक के पास कुल 9.59 लाख करोड़ रुपये हैं. यानी वित्त मंत्रालय द्वारा मांगी गई राशि आरबीआई के पास जमा कुल राशि के एक तिहाई से ज़्यादा थी.
अख़बार सूत्रों के हवाले से लिता है कि ये पैसे सरकार को दिए जाने से अर्थव्यवस्था में अस्थिरता पैदा होने का ख़तरा था और यही वजह है कि रिज़र्व बैंक ने ऐसा करने से इनकार कर दिया.
इससे पहले 2017-18 में वित्त मंत्रालय ने पूंजी की ज़रूरत का हवाला देते हुए रिज़र्व बैंक से उसके पसा जमा कुल धनराशि मांगी थी और तब भी आरबीआई ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार बाघिन अवनि का शिकार करने वाले पिता-पुत्र की जोड़ी ने कहा है कि उन्हें दोष दिया जाना बंद होना चाहिए.
उन्होंने कहा कि उन्हें बाघिन को ज़िंदा न पकड़ पाने का अफ़सोस है और उसे मारने का फ़ैसला कुछ सेकेंड में करना पड़ा. अगर वो ऐसा न करते तो वन्य कर्मचारियों की जान को
उन्होंने केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी पर मानहानि का मुक़दमा करने की बात भी कही. मेनका गांधी ने कहा था कि वो अवनि की 'हत्या' के मामले को क़ानूनी और राजनीतिक रूप से आगे ले जाएंगी.
अवनि के शिकार पर काफ़ी विवाद छिड़ा हुआ है. एक त
जनसत्ता में ख़बर
इसके साथ ही अब पतंजलि के कपड़े और जूते भी खरीदे जा सकेंगे. रामदेव ने कहा कि अगले साल मार्च तक देश के अलग-अलग हिस्सों में पतंजलि परिधान के तकरीबन 100 स्टोर खुल जाएंगे.
उन्होंने कहा कि दिवाली से पहले पतंजलि परिधान इसलिए लॉन्च किया गया ताकि विदेशी कंपनियों से मुकाबला किया जा सके.
नवभारत टाइम्स में ख़बर है कि लखनऊ के इकाना स्टेडियम का नाम अटल बिहारी वाजपेयी स्टेडियम कर दिया गया है.
नाम बदलने का ये फ़ैसला यहां भारत और वेस्टइंडीज़ के मैच से ठीक एक दिन पहले लिया गया.
इस स्टेडियम में मंगलावर भारत और वेस्टइंडीज़ के बीच दूसरा टी-20 मैच खेला जाएगा.
बताया गया है कि नाम बदलने की अनुमति उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक ने दी.
है कि योगगुरु रामदेव ने दिवाली के पहले कपड़ों के बाज़ार में एंट्री ली है. उन्होंने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी.
रामदेव ने 'पतंजलि परिधान' का उद्धाटन करके पतंजलि की जीन्स भी लॉन्च कर दी है.
बका ऐसा है जिसका कहना है कि जिस तरह उसे मारा गया वो क्रूरतापूर्ण और ग़ैरज़रूरी था.
हिंदुस्तान टाइम्स के पहले पन्ने पर ख़बर है कि देश की पहली परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत ने सोमवार को अपना पहला गश्ती अभियान पूरा किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे देश को समर्पित करते हुए धनतेरस का तोहफ़ा और सुरक्षा की गारंटी जैसा बताया.
आईएनएस अरिहंत के साथ ही भात अब जल, थल और हवा में परमाणु सक्षम हो गया है.
इस ख़बर को लगभग सभी अख़बारों ने प्रमुखता से छापा है.
ख़तरा हो सकता था.

Tuesday, October 2, 2018

瓢虫作为大自然的“杀虫剂”可助棉民增加收益

许多国家都有这样的传说:每当你看到一只瓢虫, 你都应该把它放进钱包里,因为它象征着好运气。

这些老话的背后总是不乏真理。华北平原棉田里的每一只瓢虫至少能为农民带来0.05元(约合0.01美元)的经济效益。

这可能听起来有些微不足道,但是如果将中国三分之二棉田中的瓢虫密度增加一倍,那么每年就能为农民带来3亿美元(约20亿人民币)的收入。

蚜虫对棉田作物的危害极大,而瓢虫正是它们的天敌。在中国,棉农通常使用化学杀虫剂来消灭蚜虫。长期以来,这也被认为是最简单、最经济实惠的害虫防治方法,并在全球得到了大规模使用。

自然解决方案

但是,化学杀虫剂的使用会抑制大自然提供的免费杀虫“服务”。对于蚜虫来说,漂亮而又惹人喜爱的红黑色瓢虫就是恶毒的捕食者。据估计,一只瓢虫每天可以杀死50只蚜虫,一生大约可以杀死5000只蚜虫。

结合昆虫取样和家庭调查后,我们的研究发现,瓢虫(主要包括异色瓢虫、龟纹瓢虫和七星瓢虫)能够带来相当可观的经济效益。我们计算发现,即便在同时使用大量杀虫剂的情况下,每只成年瓢虫每年仍然可以提供价值0.05元的“杀虫服务”。

但是大多数农民并不知道这个情况。

中国每公顷棉田大约有1.35万只瓢虫。如果将这些“农田卫士”的平均密度增加一倍,那么每公顷棉田就可增收664元(约合93.67美元)。如果将此举推广到全中国三分之二的棉田,则每年可增加经济收益近20亿元(约合2.908亿美元)。

好处多多

推广瓢虫治虫法可以解决的远远不止消灭蚜虫一个问题。如果能够减少化学杀虫剂的使用,对农民和整个社会的健康与环境都能带来不少好处。

中国农民过量使用化学杀虫剂导致化学制剂渗入食物、水和生态系统,从而带来了不小的环境损失。

同样,接触杀虫剂还会对农场工人、消费者、居民和牲畜带来负面的健康影响。

过量使用农药还会破坏害虫的自然防治机制,在消灭害虫的同时,也杀死了瓢虫等重要的益虫,同时还会由于害虫产生耐药性而引发虫害频繁爆发的恶性循环。

农药还会影响农场的收益。使用杀虫剂不仅成本很高,而且会让农民对杀虫剂产生“依赖”,从而放弃了其他解决办法。长远来看,减少杀虫剂用量对中国的农民是有利的。

不断升级的收益

我们的研究显示,农民使用的杀虫剂越少,瓢虫消灭蚜虫的作用就发挥得越充分。

如果我们能将现在每公顷22.35公斤的杀虫剂超标用量削减四分之三,那么瓢虫的边际价值就能从每公顷48元(约合6.98美元)上升到118元(约合17.6美元),相当于增加了2.5倍多。

一旦这种生物防控机制——这里指的就是瓢虫的棉田杀虫作用——开始发挥作用,农民就有可能会进一步减少杀虫剂的用量,尽管我们可能还需要进一步采取激励措施。但是,瓢虫和其他害虫天敌的价值就会得到提升,从而形成可持续农业迫切需要的良性循环!

这些发现从经济、健康、环境等方面为相关政策提供了强有力的证据,从而有助于通过政策减少化学物质使用、加大农民扶持力度,以降低有害生物风险。

但是,农民和政策制定者往往缺乏这方面的知识。我们该如何改变这种现状呢?首先,我们需要量化虫害生物防治机制的潜在价值,并让更多的人认识到这一价值。应该把这类信息的传播当作首要任务,例如通过农业推广服务,而且还可以通过这种服务分享有关农业化学品的健康风险以及负面环境影响的信息。

但是,仅仅共享信息还不够。

其他非经济层面的障碍仍然存在。(至少从短期来看),自然虫害防治机制的风险和不确定性似乎比杀虫剂更高。这类问题我们可以通过保险计划、农业种植策略培训等方式来加以解决。通过培训和宣传也有助于农民树立信心,放弃杀虫剂,选择害虫的自然防治机制。

所以,下次你再看到瓢虫时,不要只顾着许愿。要感谢它为我们经济做出的贡献。珍视瓢虫和其他昆虫、动物的作用,这对于我们做出最佳决策,有效管理我们的食物系统、商业活动和生活环境都至关重要。

张巍博士感谢扶贫生态系统服务( )计划,以及中国科学院对外合作计划、荷兰科学基金会、中国国家科学基金会和中国国家科学技术部、 湖州大学科学院、瓦赫宁根大学和中国农业科学院的资金支持。

Tuesday, September 11, 2018

फ़िल्म इंडस्ट्री को क्यों रास नहीं आते बेबाक बोल

पानी में रहकर मगरमच्छ से बैर नहीं करते', ये कहावत हिन्दी फ़िल्म इंडस्ट्री में भी काफ़ी फ़िट बैठती है.
बॉलीवुड में शायद ही कोई कलाकार एक-दूसरे पर हमला करते दिखते हैं. यहां हर कलाकार एक-दूसरे की प्रशंसा करता नज़र आता है. जिसने इस पंरपरा को तोड़ा है उसके करियर में ग्रहण-सा लग गया.
कंगना रनौत ने मशहूर फ़िल्मकार करन जौहर पर भाई-भतीजावाद का आरोप लगाया तो इस पर बहस लंबी खींच गई और इस मामले में कंगना अलग-थलग सी पड़ती हुई नज़र आने लगीं.
पिछले साल कंगना की फ़िल्म सिमरन आई थी, लेकिन परदे पर बहुत दिनों तक टिक नहीं पाई. इस विवाद के कारण कंगना के भविष्य को लेकर बातें होने लगीं.
फ़िलहाल कंगना के पास 'मणिकर्णिका' फ़िल्म है. हालांकि लोगों की आशंका अब भी बनी हुई है कि अगर यह फ़िल्म सफल हो भी गई तो क्या कंगना से जुड़े विवाद ख़त्म हो जाएंगे.
फ़िल्म इंडस्ट्री, जहाँ लोग बड़े दिग्गज़ों के बारे में बुरा कहने से कतराते है. वहीं कुछ ऐसे किस्से हुए हैं जब किसी सिलेब्रिटी ने किसी बड़े दिग्गज़ के बारे में कुछ कहा हो और उनके फ़िल्मी करियर पर उसका बुरा प्रभाव न पड़ा हो.
सबसे मशूर किस्सा विवेक ओबेरॉय का है. साल  में विवेक ओबेरॉय ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत राम गोपाल वर्मा की फ़िल्म कंपनी से की. उसी साल उनकी यश चोपड़ा के बैनर तले बनी फ़िल्म साथिया भी रिलीज़ हुई.
विवेक को फ़िल्म इंडस्ट्री के आने वाले दौर का चमकता सितारा माना जाने लगा. लेकिन साल 2003 में विवेक ओबेरॉय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें उन्होंने सलमान द्वारा 41 बार फ़ोन कॉल करने की बात कही जिसमें उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई थी.
ये प्रेस कॉन्फ्रेंस उनके करियर के लिए बहुत ही महंगी साबित हुई. फ़राह खान के शो में विवेक ने माना की उस प्रेस कांफ्रेंस का असर उनके करियर पर पड़ा और फ़िल्म इंडस्ट्री के लोगों ने विवेक से दूरी बना ली. दशक की बोल्ड अभिनेत्री मानी जाने वाली मामता कुलकर्णी ने फ़िल्म चाइना गेट के निर्देशक राजकुमार संतोषी पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे.
कथित तौर पर इस फ़िल्म में ममता का रोल था और उसमें उन्हें छम्मा-छम्मा गाना भी करना था, पर निर्देशक राजकुमार संतोषी के साथ कुछ अनबन हो गई और ममता को फ़िल्म से 'निकल दिया गया'.
कहा जाता है कि इसके बाद अंडरवर्ल्ड के दबाव के चलते ममता को फ़िल्म में दोबारा लिया गया. फ़िल्म रिलीज़ हुई और फ़्लॉप हो गई. फ़िल्म रिलीज़ के बाद ममता ने निर्देशक राजकुमार संतोषी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया जिसके बाद फ़िल्म इंडस्ट्री ने उनसे दूरी बनाई और उन्हें काम मिलना बंद हो गया.
वरिष्ठ पत्रकार और फ़िल्म क्रिटिक अजय ब्रह्मात्मज का कहना है की जिसका स्टारडम फ़िल्म इंडस्ट्री में कमज़ोर होता है उसका नुकसान होता है. जैसे सलमान खान का बहुत बड़ा स्टारडम है, वहीं विवेक ओबेरॉय का कमज़ोर था, इसलिए उन्हें नुकसान झेलना पड़ा.
साल 2001 में आई निर्देशक अब्बास मस्तान की फ़िल्म नबी जिसमें अक्षय कुमार, बॉबी देओल, करीना कपूर और बिपाशा बासु नज़र आए थे.
बिपाशा बासु की ये पहली फ़िल्म थी जिससे वो अपने फ़िल्मी करियर का आगाज़ कर रही थीं. कथित तौर पर फ़िल्म की शूटिंग के दौरान दोनों अभिनेत्रियों में कपड़ों को लेकर कहा-सुनी हो गई थी. अजय ब्रह्मात्मज ने बताया की कुछ समय के लिए बिपाशा बासु के करियर में इस हादसे का असर रहा था. रिष्ठ परकार जयप्रकाश चौकसे का कहना है कि,"बॉक्स ऑफ़िस फ़िल्म इंडस्ट्री में रिश्ते तय करता है. सब अपना फ़ायदा देखते है और फ़िल्म इंडस्ट्री का अंदरूनी सिद्धांत है कि कम बोलना चाहिए." sex
ट्रेन, जेल जैसी फ़िल्मों में छोटे किरदार कर चुकी पूर्व मिस इंडिया सयाली भगत ने 2011 में एक स्टेटमेंट जारी किया था जिसमें उन्होंने फ़िल्म इंडस्ट्री के शाइनी आहूजा, आर्य बब्बर, साजिद ख़ान सहित और कई बड़े कलाकारों पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे.
इस मामले में बाद में अमिताभ बच्चन ने पुलिस का सहारा लिया और तब यह मामला साइबर क्राइम का निकला. सयाली भगत ने अपने आप को साइबर क्राइम की शिकार बताते हुए सभी दिग्गजों से माफ़ी मांगी और कहा कि उनके पूर्व पब्लिसिस्ट ने बिना उनकी रज़ामंदी के ये बयान जारी किया जिससे वो बहुत शर्मिंदा हैं.
उन्होंने अपने पूर्व पब्लिसिस्ट के ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई, हालांकि इसके बाद फ़िल्मों में काम के लिए संघर्ष कर रही सयाली भगत का नाम कम ही सुना गया.
अनुराग कश्यप एक समय में सोशल मीडिया पर काफ़ी बेबाक चीज़ें लिखा करते थे. अपनी फ़िल्मों की तरह वो भी बेबाकी से फ़िल्म इंडस्ट्री के दिग्गजों के बारे में बोल देते थे. उनके बड़े भाई अभिनव कश्यप ने अपने फ़िल्मी सफ़र की शुरुआत सलमान ख़ान की फ़िल्म दबंग से की.